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देश की सबसे बड़ी अदालत को भी लगता है कि समाज में कुछ ऐसी रूढ़िवादी सोच बनी हुई है जिससे ऊपर उठकर कोर्ट में संवेदनशीलता की जरूरत है. किसी भी तरह का पूर्वाग्रह नहीं होना चाहिए. तीन साल पहले एक हैंडबुक बनी थी लेकिन उसमें कुछ ऐसा था कि आपत्ति जताई जाने लगी. अपर कास्ट के पुरुष और लोअर कास्ट की महिला को लेकर क्या कहा गया था? पढ़िए पूरी रिपोर्ट. 

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