किसी को हार्ट अटैक आया. किसी ने कहा- जीना तो चाहता हूं लेकिन क्या करूं. मुरादाबाद में बीएलओ ने मौत से पहले नोट लिखा कि नींद नहीं आती. टारगेट पर कन्फ्यूजन है. डर है कि नौकरी चली जाएगी. कुछ बीएलओ बीमार हो गए. कुछ लोग यह भी कह रहे हैं कि प्राइवेट जॉब वालों को इससे ज्यादा प्रेशर रोज झेलना होता है. आखिर बीएलओ SIR अभियान में जान क्यों दे रहे?
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